नरेन्द्र मोदी को इंग्लिश मीडिया से आखिर क्यों लगता है इतना डर?

5 जून  2017  को NDTV  के प्रमोटर और मालिक राधिका रॉय और प्रन्नोय रॉय के घर  सेंट्रल ब्यूरों ऑफ़ इन्वेस्टीगेशन (C.B.I) द्वारा छापे मारने की कारवाही की गयी. NDTV के प्रोमोटरो के ऊपर यह आरोप लगाया गया की उन्होंने आईसी आईसी आई बैंक को  48 करोड का नुक्सान पोहचाया है.

देश के इतने पुराने और विश्वसनीय चैनल पर की गयी इस करवाई के बारे मे मोदी सरकार का कहना है की सभी कारवाई कानून के हिसाबसे हो रही है. पर पूरे न्यूज़ चैनल और मीडिया मे दबी आवाज़ मे कहा जारा है की मोदी सरकार की यह कारवाई NDTV पर दिखाई जाने वाली निष्पक्ष न्यूज़ को दबाने के लिए की जारी है.

इसके पहले भी  NDTV पर नोट बंदी के दौरान मोदी सरकार ने २ दिन के लिए बंदी का हुकुम जारी किया था. पर उस वक़्त सारी मीडिया और न्यूज़ चैनल ने NDTV का साथ दिया था इसीलिए मोदी सरकार को अपनी यह हिटलर शाही अंदाज़ वाली करवाई रोकनी पड़ी.

इतना ही नहीं, बल्कि  कहा यह भी जाता है की मोदी सरकार और खुद मोदीजी को इंग्लिश मीडिया से नफरत है और वो सभी इंग्लिश न्यूज़ चैनल खास करके विदेशी न्यूज़ चैनेलो  से दूर रहते है. इसके पीछे का कारण यह है की इंग्लिश विदेशी चैनल मोदी सरकार द्वारा हो रहे गलत कामो को बिना किसी झिजक और रोक टोक के बिना सब सच उनके न्यूज़ मैं प्रसारित करके लोगो तक पोहचाते है. खबर तो यह भी है की, मोदी सरकार भारत के सभी न्यूज़ चैनेलो पर दबाव बना रही है या फिर उनको अपने पार्टी के लोगो के माध्यम से खरीद ले रही है.

नरेन्द्र मोदी को भारत के पंतप्रधान बनकर ३ साल के ऊपर हो गये है, पर उन्होंने आज तक  विदेश के इंग्लिश न्यूज़ चैनेलो को सीधे सीधे लाइव प्रेस कांफ्रेंस नहीं दी. बल्कि मोदीजी हमेशा उनके मन की बात  कहने के लिए ऑल इंडिया रेडियो का सहारा लेते है.

सब तरफ चर्चा तो यह भी है की मोदीजी सिर्फ उनके मन पसंद और  बी.जे.पी  की अच्छी खबरे दिखाने वाले सवांद दाताओ और न्यूज़ चंनेलो को ही इंटरव्यू देते है. इसके अलावा अपने मन की बात कहने के लिए मोदीजी सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट ट्वीटर का भी सहारा लेते है. दुनिया मैं पॉलिटिशियन जगत मे बराक ओबामा के 90 मिलियन दुनिया भर के प्रशंशको के बाद मोदीजी की  30+ मिलियन की फैन फोल्लोविंग सबसे ज्यादा है.

मोदी सरकार और उनके कार्यकर्ताओ ने हमेशा इंग्लिश और विदेशी मीडिया को कोसने का ही काम किया है. मोदी सरकार के एक मिनिस्टर ने तो इंग्लिश मीडिया को “presstitutes” ( वेश्या समान खबरों की दलाली करके खुदको बेचना) तक कह डाला था.

भारत मैं सिर्फ गिनती के कुछ न्यूज़ चैनल और मीडिया को छोड़कर बाकी सबको मोदी सरकार ने पैसो से कुछ सालो के लिए  खरीद लिया है या उनको अपनी मर्ज़ी से खबरे ना छापने पर मजबूर कर दिया गया है.

अमेरिका के एक नीजी  फ्रीडम ऑफ़ दी प्रेस २०१७ नामक न्यूज़ चैनेल  ने  भारत को ” partly Free ” ऐसा सम्भोदित किया है. इसका मतलब यह की भारत आजाद होकर भी पूरी तरह आजाद नहीं है और किसी प्रकार की गुलामी मे है.

इंग्लिश न्यूज़ चैनेलो के मुताबिक भारतीय मीडिया काफी दबाव मैं काम कर रही है. मीडिया को कोई भी खबर दिखाने की पूरी तरह से आज़ादी नहीं मिल रही है. मोदी सरकार के कार्यकाल मै काफी सारे न्यूज़ रिपोर्टरों को उनके काम करने के तरीके के लिए धमकाया जा चूका है और उसका जीगता जागता उदहारण NDTV के ऊपर लगाया गयी २ दिन का बंदी थी. विदेशी न्यूज़ चैनेलो का यह भी दावा है की भारत की ज़्यादातर मीडिया और न्यूज़ चैनेलो को मोदी सरकार ने किसी ना किसी माध्यम से खरीद लिया है या फिर जो इमानदारी से कर रहे है उनको धमका कर चुप कराया जा रहा है.  

चाहे नजीब अहमद के गायब होने की खबर हो,  रोहित वेमुला की आत्महत्या का केस हो या फिर हाली मे घटी सहारनपुर की जाती वादी घटना हो. सब खबरों को मोदी सरकार के इशारो पर ही ना दिखाए जाने की मीडिया पर दबाव है. विदेशी चैनेलो का यह भी कहना है की मोदीजी विदेशी न्यूज़ चैनेलो को इंटरव्यू देने से डरते है क्यूंकि उनके सरकार जाती वादी है और उनकी कटुनीतिया कही देश की जनता के सामने ना आजाये.

एक विदेशी मीडिया watch organisation reporters withouth borders ने उनके २०१७ के एक खबर मे भारतीय मीडिया को 136 रैंकिंग दी है, 2016 के मुकाबले 3 पॉइंट्स कम. बल्कि अफगानिस्तान की मीडिया को भारतीय मीडिया से ज्यादा आजाद मीडिया बताया गया है.

विदेशी इंग्लिश न्यूज़ चैनेलो का यह भी कहना है की भारतीय मीडिया के महिला रिपोर्टर जो इमानदारी से सरकारी अफसरों की भ्रष्ट नीतिया सरकार के सामने लाने की कोशिश करते है उनको मोदी सरकार के कार्यकर्ता सोशल मीडिया और फ़ोन के द्वारा धमका रहे है और बलात्कार की धमकिय दे रहे है और जो रिपोर्टर सरकार के खिलाफ अपनी आवाज़ नहीं दबा रहे है उनपर section 124 A पेनल कोड के तेहत केस लगाकर डराया जा रहा है.

विदेशी न्यूज़ चैनेलो का कहना है की मोदीजी हमेशा उनके सवालो से दूर भागते है. वैसे भी मोदीजी ने अभी तक कि किसी भी विदेशी न्यूज़ चैनेलो को सीधे सीधे लाइव इंटरव्यू नहीं दिया है. संसद की बेहेस के दौरान भी मोदीजी ज्यादातर बार चुप ही रहते है ऐसा उनपर आरोप है.

आखिर क्यों हमारे पंतप्रधान मोदीजी विदेशी चैनेलो से डरते है?? मोदीजी देश आपके साथ है , एक बार आप विदेशी चैनेलो को लाइव इंटरव्यू दे दीजिये और बता दीजिये की भारतीय किसीसे नहीं डरते.


 

 

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